बदलते मौसम चक्र ने भारत के कृषि क्षेत्र के सामने एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। कहीं अतिवृष्टि तो कहीं सूखे की स्थिति के कारण पारंपरिक फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब हमें खेती के तरीकों में बुनियादी बदलाव करने की तत्काल आवश्यकता महसूस हो रही है।
पारंपरिक फसलों की ओर वापसी
मोटे अनाज यानी बाजरा, रागी और ज्वार जैसी शुष्क प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि ज़रूरत बन चुका है। ये फसलें कम पानी और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी उपज देने में सक्षम हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रोत्साहन कार्यक्रमों के कारण किसान भी अब इन पारंपरिक और पौष्टिक फसलों की तरफ फिर से रुख कर रहे हैं।
कृषि में आधुनिक तकनीक का समावेश
ड्रोन द्वारा सटीक कीटनाशक छिड़काव और मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के उपयोग से फसलों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों ने पानी के सदुपयोग को बढ़ावा दिया है। तकनीक और पारंपरिक कृषि ज्ञान का यह तालमेल ही आने वाले समय में देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा |
